अयोध्याकाण्ड · सोरठा 251 · सोरठा
बिहरहिं बन चहु ओर प्रतिदिन प्रमुदित लोग सब।
बिहरहिं बन चहु ओर प्रतिदिन प्रमुदित लोग सब।
जल ज्यों दादुर मोर भए पीन पावस प्रथम॥ २५१॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.251 · पुस्तक पृ. 552, 553
भावार्थ और शब्दार्थ
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1बिहरहिं बन चहु ओर प्रतिदिन प्रमुदित लोग सब।
सभी लोग आनंदित होकर प्रतिदिन वन में चारों ओर विहार करते हैं।
English explanation
All the people, delighted, roam through the forest in every direction each day.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिहरहिं | विहार करते हैं; घूमते हैं | roam; wander happily |
| बन | वन में | in the forest |
| चहु | चारों | all four |
| ओर | दिशाओं में | directions |
| प्रतिदिन | हर दिन | every day |
| प्रमुदित | बहुत आनंदित | delighted |
| लोग | लोग | people |
| सब | सभी | all |
2जल ज्यों दादुर मोर भए पीन पावस प्रथम॥ २५१॥
वे ऐसे पुष्ट और प्रफुल्लित हो गए, जैसे वर्षा ऋतु की पहली वर्षा के जल से मेंढक और मोर हो जाते हैं।
English explanation
They became vigorous and full of joy, like frogs and peacocks with the water of the season’s first rains.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जल | वर्षा के जल से | with rainwater |
| ज्यों | जैसे | just as; like |
| दादुर | मेंढक | frogs |
| मोर | मोर | peacocks |
| भए | हो गए | became |
| पीन | पुष्ट; स्फूर्तिवान | well-nourished; vigorous |
| पावस | वर्षा ऋतु की वर्षा | monsoon rain |
| प्रथम | पहली; आरंभ की | first; at the onset |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- सोरठा 251
- स्रोत अभिलेख
- 2.251
- सहायक विषय
- वनवासियोंद्वारा भरतजीकी मण्डलीका सत्कार, कैकेयीका पश्चात्ताप
- मुद्रित पृष्ठ
- 552, 553
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