अयोध्याकाण्ड · दोहा 54 · दोहा/सोरठा
निरखि राम रुख सचिवसुत कारनु कहेउ बुझाइ।
निरखि राम रुख सचिवसुत कारनु कहेउ बुझाइ।
सुनि प्रसंगु रहि मूक जिमि दसा बरनि नहिं जाइ।।54।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.54 · पुस्तक पृ. 388, 389
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1निरखि राम रुख सचिवसुत कारनु कहेउ बुझाइ।
राम का रुख देखकर मंत्री के पुत्र ने कारण समझाकर बता दिया।
English explanation
Observing Rama’s disposition, the minister’s son explained the cause.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निरखि | देखकर | observing |
| राम | राम का | Rama’s |
| रुख | रुख; अभिप्राय | disposition; intention |
| सचिवसुत | मंत्री के पुत्र ने | the minister’s son |
| कारनु | कारण | the cause |
| कहेउ | कहा; बताया | told |
| बुझाइ | समझाकर | with an explanation |
2 सुनि प्रसंगु रहि मूक जिमि दसा बरनि नहिं जाइ।।54।।
वृत्तांत सुनकर माता गूँगी-सी रह गईं; उनकी दशा का वर्णन नहीं किया जा सकता।
English explanation
Hearing the account, the mother became as if mute; her condition cannot be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| प्रसंगु | वृत्तांत; घटना का विवरण | the account of events |
| रहि | रह गईं | remained; became |
| मूक | गूँगी; बोल न सकने वाली | mute; unable to speak |
| जिमि | के समान | as if |
| दसा | दशा; अवस्था | condition |
| बरनि | वर्णित की | described |
| नहिं | नहीं | not |
| जाइ | जा सकती | can be |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 54
- स्रोत अभिलेख
- 2.54
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 388, 389
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।