अयोध्याकाण्ड · दोहा 270 · दोहा/सोरठा
नाहि त कोसल नाथ कें साथ कुसल गइ नाथ।
नाहि त कोसल नाथ कें साथ कुसल गइ नाथ।
मिथिला अवध बिसेष तें जगु सब भयउ अनाथ।।270।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.27 · पुस्तक पृ. 568, 569
भावार्थ और शब्दार्थ
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1नाहि त कोसल नाथ कें साथ कुसल गइ नाथ।
‘अन्यथा, हे नाथ, कोसल के राजा दशरथ के साथ ही कुशलता चली गई।’
English explanation
‘Otherwise, my lord, well-being departed along with Dasharatha, the king of Kosala.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाहि | नहीं | not |
| त | तो | then |
| कोसल | कोसल के | of Kosala |
| नाथ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| कें | के | with |
| साथ | साथ | along |
| कुसल | कुशलता | well-being |
| गइ | चली गई | departed |
| नाथ | हे नाथ | O lord |
2 मिथिला अवध बिसेष तें जगु सब भयउ अनाथ।।270।।
‘सारा संसार अनाथ हो गया है, विशेष रूप से मिथिला और अयोध्या।’
English explanation
‘The whole world has become bereft of its protector, especially Mithila and Ayodhya.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मिथिला | मिथिला | Mithila, Janaka’s realm |
| अवध | अयोध्या | Ayodhya |
| बिसेष | विशेष रूप | especially |
| तें | से | in particular |
| जगु | संसार | world |
| सब | सारा | whole |
| भयउ | हो गया | has become |
| अनाथ | रक्षक से वंचित | bereft of a protector |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 270
- स्रोत अभिलेख
- 2.27
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 568, 569
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