अयोध्याकाण्ड · दोहा 271 · दोहा/सोरठा
गए अवध चर भरत गति बूझि देखि करतूति।
गए अवध चर भरत गति बूझि देखि करतूति।
चले चित्रकूटहि भरतु चार चले तेरहूति।।271।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.271 · पुस्तक पृ. 569, 570
भावार्थ और शब्दार्थ
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1गए अवध चर भरत गति बूझि देखि करतूति।
गुप्तचर अयोध्या गए; उन्होंने भरत की स्थिति जानी और उनके आचरण को देखा।
English explanation
The spies went to Ayodhya, ascertained Bharata’s situation, and observed his conduct.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गए | गए | went |
| अवध | अयोध्या | to Ayodhya |
| चर | गुप्तचर | the spies |
| भरत | भरत की | Bharata’s |
| गति | स्थिति और मनोवृत्ति | situation and disposition |
| बूझि | जानकर | having ascertained |
| देखि | देखकर | having observed |
| करतूति | आचरण | conduct |
2 चले चित्रकूटहि भरतु चार चले तेरहूति।।271।।
भरत चित्रकूट की ओर चले और गुप्तचर तिरहुत की ओर चले।
English explanation
Bharata set out for Chitrakoot, while the spies set out for Tirhut.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | चल पड़े | set out |
| चित्रकूटहि | चित्रकूट की ओर | toward Chitrakoot |
| भरतु | भरत | Bharata, Rama’s brother |
| चार | गुप्तचर | the spies |
| चले | चल पड़े | set out |
| तेरहूति | तिरहुत की ओर | toward Tirhut, the Mithila region |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 271
- स्रोत अभिलेख
- 2.271
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 569, 570
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