अयोध्याकाण्ड · दोहा 51 · दोहा/सोरठा
नव गयंदु रघुबीर मनु राजु अलान समान।
नव गयंदु रघुबीर मनु राजु अलान समान।
छूट जानि बन गवनु सुनि उर अनंदु अधिकान।।51।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.51 · पुस्तक पृ. 386, 387
भावार्थ और शब्दार्थ
1नव गयंदु रघुबीर मनु राजु अलान समान।
रघुवीर राम का मन युवा हाथी के समान था और राज्य उसके बाँधने के खूँटे के समान।
English explanation
Rama's mind was like a young elephant, and kingship like the stake that tethered it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नव | युवा | young |
| गयंदु | गजराज, विशाल हाथी | a mighty elephant |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम का | of Rama, hero of Raghu's lineage |
| मनु | मन | mind |
| राजु | राज्य का दायित्व | kingship |
| अलान | हाथी बाँधने का खूँटा | an elephant's tethering stake |
| समान | के समान | like |
2 छूट जानि बन गवनु सुनि उर अनंदु अधिकान।।51।।
वन जाने की बात सुनकर और उसे उस बंधन से मुक्ति समझकर राम के हृदय में आनंद और बढ़ गया।
English explanation
Hearing of his departure for the forest and understanding it as release from that tether, Rama felt still greater joy in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छूट | बंधन से मुक्ति | release from the tether |
| जानि | समझकर | recognizing |
| बन | वन को | to the forest |
| गवनु | जाना | departure |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| उर | हृदय में | in his heart |
| अनंदु | आनंद | joy |
| अधिकान | और अधिक हुआ | became still greater |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 51
- स्रोत अभिलेख
- 2.51
- सहायक विषय
- श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवध-वासियोंका विषाद, कैकेयीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 386, 387
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