अयोध्याकाण्ड · दोहा 307 · दोहा/सोरठा
देव देव अभिषेक हित गुर अनुसासनु पाइ।
देव देव अभिषेक हित गुर अनुसासनु पाइ।
आनेउँ सब तीरथ सलिलु तेहि कहँ काह रजाइ।।307।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.307 · पुस्तक पृ. 601, 601
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1देव देव अभिषेक हित गुर अनुसासनु पाइ।
हे देवों के देव, आपके अभिषेक के लिए गुरु की आज्ञा पाकर—
English explanation
O Lord of gods, having received the guru’s instruction for your royal consecration—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देव | देवों के | of the gods |
| देव | हे देव | O Lord |
| अभिषेक | राज्याभिषेक | royal consecration |
| हित | के लिए | for |
| गुर | गुरु की | the guru’s |
| अनुसासनु | आज्ञा | instruction |
| पाइ | पाकर | having received |
2 आनेउँ सब तीरथ सलिलु तेहि कहँ काह रजाइ।।307।।
मैं सभी तीर्थों का जल लाया हूँ; उसके लिए आपकी क्या आज्ञा है?
English explanation
I have brought water from all the sacred pilgrimage places; what do you command regarding it?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आनेउँ | मैं लाया हूँ | I have brought |
| सब | सभी | all |
| तीरथ | तीर्थों का | of sacred pilgrimage places |
| सलिलु | जल | water |
| तेहि | उस जल के | that water |
| कहँ | लिए, संबंध में | for, regarding |
| काह | क्या | what |
| रजाइ | आज्ञा | command |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 307
- स्रोत अभिलेख
- 2.307
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 601, 601
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।