अयोध्याकाण्ड · दोहा 312 · दोहा/सोरठा
देखे थल तीरथ सकल भरत पाँच दिन माझ।
देखे थल तीरथ सकल भरत पाँच दिन माझ।
कहत सुनत हरि हर सुजसु गयउ दिवसु भइ साँझ।।312।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.312 · पुस्तक पृ. 605, 605
भावार्थ और शब्दार्थ
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1देखे थल तीरथ सकल भरत पाँच दिन माझ।
भरत ने पाँच दिनों के भीतर सभी स्थल और तीर्थ देख लिए।
English explanation
Within five days, Bharat visited all the sites and sacred places.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखे | देख लिए | visited |
| थल | स्थल | sites |
| तीरथ | तीर्थस्थल | sacred places |
| सकल | सभी | all |
| भरत | भरत ने | Bharat, Rama’s brother |
| पाँच | पाँच | five |
| दिन | दिनों के | days |
| माझ | भीतर | within |
2 कहत सुनत हरि हर सुजसु गयउ दिवसु भइ साँझ।।312।।
विष्णु और शिव के सुंदर यश का कथन और श्रवण करते हुए दिन बीत गया और साँझ हो गई।
English explanation
As they recounted and listened to the glorious deeds of Vishnu and Shiva, the day passed and evening came.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहत | कहते हुए | recounting |
| सुनत | सुनते हुए | listening |
| हरि | भगवान विष्णु | Lord Vishnu |
| हर | भगवान शिव | Lord Shiva |
| सुजसु | सुंदर यश | glorious renown and deeds |
| गयउ | बीत गया | passed |
| दिवसु | दिन | the day |
| भइ | हो गई | came |
| साँझ | साँझ | evening |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 312
- स्रोत अभिलेख
- 2.312
- सहायक विषय
- भरतजीका तीर्थ-जल-स्थापन तथा चित्रकूटभ्रमण
- मुद्रित पृष्ठ
- 605, 605
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