अयोध्याकाण्ड · दोहा 313 · दोहा/सोरठा
जेहिं उपाय पुनि पाय जनु देखै दीनदयाल।
जेहिं उपाय पुनि पाय जनु देखै दीनदयाल।
सो सिख देइअ अवधि लगि कोसलपाल कृपाल।।313।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.313 · पुस्तक पृ. 605, 606
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1जेहिं उपाय पुनि पाय जनु देखै दीनदयाल।
‘हे दीनों पर दया करने वाले, जिस उपाय से आपका यह सेवक फिर आपके चरणों के दर्शन कर सके—’
English explanation
‘O compassionate one toward the lowly, by whatever means this servant may see your feet again—’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहिं | जिससे; जिस | by which |
| उपाय | उपाय | means |
| पुनि | फिर | again |
| पाय | चरण | feet |
| जनु | सेवक; मैं भरत | servant; Bharata himself |
| देखै | देख सके | may see |
| दीनदयाल | हे दीनों पर दया करने वाले | O compassionate one toward the lowly |
2 सो सिख देइअ अवधि लगि कोसलपाल कृपाल।।313।।
‘हे कृपालु कोसलपाल राम, वनवास की अवधि तक के लिए वही शिक्षा मुझे दीजिए।’
English explanation
‘O gracious Rama, protector of Kosala, give me that guidance for the period of your exile.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वही | that |
| सिख | शिक्षा; मार्गदर्शन | guidance |
| देइअ | दीजिए | please give |
| अवधि | वनवास की अवधि | the period of exile |
| लगि | तक; के लिए | for; until its end |
| कोसलपाल | हे कोसल के पालक राम | O Rama, protector of Kosala |
| कृपाल | दयालु | gracious |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 313
- स्रोत अभिलेख
- 2.313
- सहायक विषय
- भरतजीका तीर्थ-जल-स्थापन तथा चित्रकूटभ्रमण
- मुद्रित पृष्ठ
- 605, 606
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