अयोध्याकाण्ड · दोहा 169 · दोहा/सोरठा
तात हृदयँ धीरजु धरहु करहु जो अवसर आजु।
तात हृदयँ धीरजु धरहु करहु जो अवसर आजु।
उठे भरत गुर बचन सुनि करन कहेउ सबु साजु।।169।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.169 · पुस्तक पृ. 483, 484
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1तात हृदयँ धीरजु धरहु करहु जो अवसर आजु।
प्रिय पुत्र, हृदय में धैर्य धरो और आज के अवसर पर जो उचित कर्तव्य है, उसे करो।
English explanation
Dear son, take courage in your heart and do what today's circumstances require.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | प्रिय पुत्र | dear son |
| हृदयँ | हृदय में | in your heart |
| धीरजु | धैर्य | fortitude; patience |
| धरहु | धारण करो | maintain |
| करहु | करो | do |
| जो | जो कार्य | what |
| अवसर | अवसर के अनुरूप | the circumstances require |
| आजु | आज | today |
2 उठे भरत गुर बचन सुनि करन कहेउ सबु साजु।।169।।
गुरु के वचन सुनकर भरत उठे और सारी आवश्यक व्यवस्था करने को कहा।
English explanation
Hearing his preceptor's words, Bharata rose and directed that all the necessary preparations be made.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उठे | उठे | rose |
| भरत | भरत | Bharata, Rama's brother |
| गुर | गुरु वसिष्ठ के | of his preceptor Vasishtha |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| करन | करने के लिए | to make |
| कहेउ | कहा; निर्देश दिया | said; directed |
| सबु | सारी | all |
| साजु | व्यवस्था; तैयारी | arrangements; preparations |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 169
- स्रोत अभिलेख
- 2.169
- सहायक विषय
- भरत-कौसल्या-संवाद और दशरथजीकी अन्त्येष्टि क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 483, 484
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