अयोध्याकाण्ड · दोहा 104 · दोहा/सोरठा
तब गनपति सिव सुमिरि प्रभु नाइ सुरसरिहि माथ।
तब गनपति सिव सुमिरि प्रभु नाइ सुरसरिहि माथ।
सखा अनुज सिया सहित बन गवनु कीन्ह रधुनाथ।।104।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.104 · पुस्तक पृ. 429, 430
भावार्थ और शब्दार्थ
1 तब गनपति सिव सुमिरि प्रभु नाइ सुरसरिहि माथ।
तब प्रभु राम ने गणेश और शिव का स्मरण किया और गंगा को सिर झुकाया।
English explanation
Then Lord Rama remembered Ganesha and Shiva and bowed his head to Ganga.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| गनपति | गणेश, गणों के स्वामी | Ganesha, lord of the divine hosts |
| सिव | शिव | Shiva, the deity |
| सुमिरि | स्मरण करके | having remembered |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
| सुरसरिहि | गंगा को | to Ganga, the celestial river |
| माथ | सिर | head |
2 सखा अनुज सिया सहित बन गवनु कीन्ह रधुनाथ।।104।।
रघुनाथ राम ने मित्र गुह, छोटे भाई लक्ष्मण और सीता के साथ वन की ओर प्रस्थान किया।
English explanation
Rama, lord of Raghu’s lineage, departed for the forest with his friend Guha, his younger brother Lakshmana, and Sita.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सखा | मित्र गुह | his friend Guha |
| अनुज | छोटे भाई लक्ष्मण | his younger brother Lakshmana |
| सिया | सीता | Sita, Rama’s wife |
| सहित | के साथ | together with |
| बन | वन की ओर | to the forest |
| गवनु | प्रस्थान; गमन | departure; journey |
| कीन्ह | किया | undertook |
| रधुनाथ | रघुवंश के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 104
- स्रोत अभिलेख
- 2.104
- सहायक विषय
- केवटका प्रेम और गङ्गा-पार जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 429, 430
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।