अयोध्याकाण्ड · दोहा 103 · दोहा/सोरठा
प्राननाथ देवर सहित कुसल कोसला आइ।
प्राननाथ देवर सहित कुसल कोसला आइ।
पूजहि सब मनकामना सुजसु रहिहि जग छाइ।।103।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.103 · पुस्तक पृ. 429, 429
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1प्राननाथ देवर सहित कुसल कोसला आइ।
‘तुम प्राणप्रिय पति और देवर सहित सकुशल अयोध्या लौट आओगी।’
English explanation
“You will return safely to Ayodhya with your beloved husband and his younger brother.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्राननाथ | प्राणप्रिय पति राम | Rama, your dearly beloved husband |
| देवर | देवर लक्ष्मण | Lakshmana, your husband's younger brother |
| सहित | के साथ | together with |
| कुसल | सकुशल | safely |
| कोसला | अयोध्या में | to Ayodhya |
| आइ | आकर | having returned |
2 पूजहि सब मनकामना सुजसु रहिहि जग छाइ।।103।।
‘तब तुम्हारी सभी मनोकामनाएँ पूरी होंगी और तुम्हारा सुंदर यश संसार में छाया रहेगा।’
English explanation
“Then all your wishes will be fulfilled, and your noble fame will continue to pervade the world.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूजहि | पूरी होंगी | will be fulfilled |
| सब | सभी | all |
| मनकामना | मन की इच्छाएँ | heart's wishes |
| सुजसु | सुंदर यश | noble fame |
| रहिहि | रहेगा | will remain |
| जग | संसार में | throughout the world |
| छाइ | छाया हुआ | spread abroad |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 103
- स्रोत अभिलेख
- 2.103
- सहायक विषय
- केवटका प्रेम और गङ्गा-पार जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 429, 429
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