अयोध्याकाण्ड · दोहा 123 · दोहा/सोरठा
जिन्ह जिन्ह देखे पथिक प्रिय सिय समेत दोउ भाइ।
जिन्ह जिन्ह देखे पथिक प्रिय सिय समेत दोउ भाइ।
भव मगु अगमु अनंदु तेइ बिनु श्रम रहे सिराइ।।123।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.123 · पुस्तक पृ. 445, 446
भावार्थ और शब्दार्थ
1जिन्ह जिन्ह देखे पथिक प्रिय सिय समेत दोउ भाइ।
जिन-जिन लोगों ने सीता सहित दोनों प्रिय पथिक भाइयों को देखा—
English explanation
All those who saw the two beloved traveling brothers together with Sita—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिन्ह | जिन लोगों ने | those who |
| जिन्ह | जिन भी लोगों ने | each and every one who |
| देखे | देखा | saw |
| पथिक | यात्री | traveling |
| प्रिय | प्रिय और मनोहर | beloved and charming |
| सिय | सीता | Sita |
| समेत | सहित | together with |
| दोउ | दोनों | both |
| भाइ | भाइयों को | brothers |
2 भव मगु अगमु अनंदु तेइ बिनु श्रम रहे सिराइ।।123।।
उन्होंने बिना श्रम संसार का दुर्गम मार्ग पार कर लिया। ‘अनंदु’ के कारण मार्ग के एक विशेषण का अर्थ अनिश्चित है।
English explanation
They completed the difficult journey of worldly existence without effort. The reading ‘अनंदु’ leaves one qualifier of that journey uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भव | संसार का | of worldly existence |
| मगु | मार्ग | path |
| अगमु | दुर्गम | hard to traverse |
| अनंदु | संभवतः अनंत, अंतहीन; संसार-यात्रा का विशेषण। | Probably endless or boundless, describing the journey through worldly existence. |
| तेइ | वे ही लोग | those very people |
| बिनु | बिना | without |
| श्रम | परिश्रम | effort |
| रहे | कर चुके | had completed |
| सिराइ | पूरा करके, पार करके | finishing, traversing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 123
- स्रोत अभिलेख
- 2.123
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 445, 446
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।