अयोध्याकाण्ड · दोहा 124 · दोहा/सोरठा
सुचि सुंदर आश्रमु निरखि हरषे राजिवनेन।
सुचि सुंदर आश्रमु निरखि हरषे राजिवनेन।
सुनि रघुबर आगमनु मुनि आगें आयउ लेन।।124।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.124 · पुस्तक पृ. 446, 447
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सुचि सुंदर आश्रमु निरखि हरषे राजिवनेन।
पवित्र और सुंदर आश्रम को देखकर कमलनयन राम प्रसन्न हुए।
English explanation
Seeing the pure and beautiful hermitage, lotus-eyed Rama rejoiced.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुचि | पवित्र; स्वच्छ | pure; clean |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| आश्रमु | आश्रम को | the hermitage |
| निरखि | देखकर | having seen |
| हरषे | प्रसन्न हुए | rejoiced |
| राजिवनेन | कमलनयन राम | lotus-eyed Rama |
2 सुनि रघुबर आगमनु मुनि आगें आयउ लेन।।124।।
रघुश्रेष्ठ राम के आगमन की बात सुनकर मुनि वाल्मीकि उन्हें लेने आगे आए।
English explanation
Hearing of Rama’s arrival, the sage Valmiki came forward to receive him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| रघुबर | रघुकुल में श्रेष्ठ राम का | of Rama, foremost of Raghu’s line |
| आगमनु | आगमन | arrival |
| मुनि | मुनि वाल्मीकि | the sage Valmiki |
| आगें | आगे | forward |
| आयउ | आए | came |
| लेन | अगवानी करने | to receive him |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 124
- स्रोत अभिलेख
- 2.124
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 446, 447
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