अयोध्याकाण्ड · दोहा 122 · दोहा/सोरठा
एहि बिधि रघुकुल कमल रबि मग लोगन्ह सुख देत।
एहि बिधि रघुकुल कमल रबि मग लोगन्ह सुख देत।
जाहिं चले देखत बिपिन सिय सौमित्रि समेत।।122।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.122 · पुस्तक पृ. 445, 445
भावार्थ और शब्दार्थ
1एहि बिधि रघुकुल कमल रबि मग लोगन्ह सुख देत।
इस प्रकार रघुवंशरूपी कमल के सूर्य श्रीराम मार्ग के लोगों को सुख देते हुए आगे बढ़ते हैं।
English explanation
In this way Rama, the sun to the lotus of Raghu’s dynasty, proceeds while bringing joy to people along the road.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | way |
| रघुकुल | रघु का वंश | Raghu’s dynasty |
| कमल | कमल | lotus |
| रबि | सूर्य; यहाँ श्रीराम | the sun; here, Rama |
| मग | मार्ग में | along the road |
| लोगन्ह | लोगों को | to the people |
| सुख | सुख | joy |
| देत | देते हुए | giving |
2 जाहिं चले देखत बिपिन सिय सौमित्रि समेत।।122।।
वे सीता और सुमित्रापुत्र लक्ष्मण के साथ वन देखते हुए आगे चले जाते हैं।
English explanation
He continues onward with Sita and Lakshmana, Sumitra’s son, observing the forest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाहिं | जाते हैं | goes onward |
| चले | चले; आगे बढ़ते हुए | proceeding |
| देखत | देखते हुए | observing |
| बिपिन | वन | the forest |
| सिय | सीता | Sita |
| सौमित्रि | सुमित्रा के पुत्र लक्ष्मण | Lakshmana, son of Sumitra |
| समेत | सहित, साथ | together with |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 122
- स्रोत अभिलेख
- 2.122
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 445, 445
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।