अयोध्याकाण्ड · दोहा 121 · दोहा/सोरठा
अबला बालक बृद्ध जन कर मीजहिं पछिताहिं।।
अबला बालक बृद्ध जन कर मीजहिं पछिताहिं।।
होहिं प्रेमबस लोग इमि रामु जहाँ जहँ जाहिं।।121।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.121 · पुस्तक पृ. 444, 444
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1अबला बालक बृद्ध जन कर मीजहिं पछिताहिं।।
असमर्थ स्त्रियाँ, बच्चे और वृद्ध लोग हाथ मलते हुए पछताते हैं।
English explanation
Women unable to go, children, and elderly people wring their hands in regret.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अबला | असमर्थ स्त्रियाँ | women unable to go |
| बालक | बच्चे | children |
| बृद्ध | वृद्ध | elderly |
| जन | लोग | people |
| कर | हाथ | hands |
| मीजहिं | मलते हैं | wring |
| पछिताहिं | पछताते हैं | regret |
2 होहिं प्रेमबस लोग इमि रामु जहाँ जहँ जाहिं।।121।।
राम जहाँ-जहाँ जाते हैं, वहाँ लोग इसी प्रकार प्रेम के वश हो जाते हैं।
English explanation
Wherever Rama goes, people become overcome with love in this way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होहिं | हो जाते हैं | become |
| प्रेमबस | प्रेम के वश | overcome with love |
| लोग | लोग | people |
| इमि | इस प्रकार | in this way |
| रामु | राम | Rama |
| जहाँ | जहाँ | wherever |
| जहँ | जहाँ भी | in each place |
| जाहिं | जाते हैं | goes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 121
- स्रोत अभिलेख
- 2.121
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 444, 444
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