अयोध्याकाण्ड · दोहा 209 · दोहा/सोरठा
जासु सनेह सकोच बस राम प्रगट भए आइ।।
जासु सनेह सकोच बस राम प्रगट भए आइ।।
जे हर हिय नयननि कबहुँ निरखे नहीं अघाइ।।209।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.209 · पुस्तक पृ. 516, 517
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1जासु सनेह सकोच बस राम प्रगट भए आइ।।
जिनके प्रेम और मान रखने के वश होकर राम स्वयं आकर प्रकट हुए।
English explanation
Moved by his love and regard for him, Rama himself came and manifested.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जासु | जिनके | whose |
| सनेह | प्रेम | love |
| सकोच | मान रखने की भावना | regard and loving deference |
| बस | के वश होकर | moved by |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| प्रगट | प्रकट | manifest |
| भए | हुए | became |
| आइ | आकर | having come |
2 जे हर हिय नयननि कबहुँ निरखे नहीं अघाइ।।209।।
वे राम, जिन्हें शिव ने हृदय में और आँखों से देखकर कभी तृप्ति नहीं पाई।
English explanation
Those very Rama, whom Shiva has never had his fill of beholding, in his heart or with his eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जिन राम को | whom, namely Rama |
| हर | शिव | Shiva |
| हिय | हृदय में | in the heart |
| नयननि | आँखों से | with the eyes |
| कबहुँ | कभी भी | ever |
| निरखे | देखा | beheld |
| नहीं | नहीं | not |
| अघाइ | तृप्त होकर | to full satisfaction |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 209
- स्रोत अभिलेख
- 2.209
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 516, 517
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