अयोध्याकाण्ड · दोहा 210 · दोहा/सोरठा
पुलक गात हियँ रामु सिय सजल सरोरुह नैन।
पुलक गात हियँ रामु सिय सजल सरोरुह नैन।
करि प्रनामु मुनि मंडलिहि बोले गदगद बैन।।210।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.21 · पुस्तक पृ. 517, 518
भावार्थ और शब्दार्थ
1पुलक गात हियँ रामु सिय सजल सरोरुह नैन।
भरत का शरीर रोमांचित था, हृदय में राम और सीता थे, और कमल जैसे नेत्र आँसुओं से भरे थे।
English explanation
Bharata’s body thrilled with emotion; Rama and Sita were in his heart, and his lotus-like eyes were filled with tears.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुलक | रोमांचित | thrilling with emotion |
| गात | शरीर | body |
| हियँ | हृदय में | in the heart |
| रामु | राम | Rama |
| सिय | सीता | Sita |
| सजल | आँसुओं से भरे | filled with tears |
| सरोरुह | कमल जैसे | lotus-like |
| नैन | नेत्र | eyes |
2 करि प्रनामु मुनि मंडलिहि बोले गदगद बैन।।210।।
मुनियों की मंडली को प्रणाम करके भरत भावावेश से रुँधे स्वर में बोले।
English explanation
Bowing to the assembly of sages, Bharata spoke in a voice choked with emotion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having made |
| प्रनामु | प्रणाम | a reverential bow |
| मुनि | मुनियों की | of sages |
| मंडलिहि | मंडली को | to the assembly |
| बोले | बोले | spoke |
| गदगद | भावावेश से रुँधे हुए | choked with emotion |
| बैन | वचन; बोल | words |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 210
- स्रोत अभिलेख
- 2.21
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 517, 518
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।