अयोध्याकाण्ड · दोहा 211 · दोहा/सोरठा
अजिन बसन फल असन महि सयन डासि कुस पात।
अजिन बसन फल असन महि सयन डासि कुस पात।
बसि तरु तर नित सहत हिम आतप बरषा बात।।211।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.211 · पुस्तक पृ. 518, 519
भावार्थ और शब्दार्थ
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1अजिन बसन फल असन महि सयन डासि कुस पात।
मृगचर्म उनके वस्त्र हैं, फल उनका भोजन है, और कुश तथा पत्ते बिछाकर वे धरती पर सोते हैं।
English explanation
Deerskins are their clothing and fruit their food; they sleep on the earth after spreading grass and leaves.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अजिन | मृगचर्म | deerskin |
| बसन | वस्त्र | clothing |
| फल | फल | fruit |
| असन | भोजन | food |
| महि | धरती पर | on the earth |
| सयन | शयन | sleeping |
| डासि | बिछाकर | having spread |
| कुस | कुश घास | kusha grass |
| पात | पत्ते | leaves |
2 बसि तरु तर नित सहत हिम आतप बरषा बात।।211।।
वे पेड़ों के नीचे रहकर प्रतिदिन ठंड, धूप, वर्षा और हवा सहते हैं।
English explanation
Living beneath trees, they daily endure cold, the sun's heat, rain, and wind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बसि | रहकर | living |
| तरु | पेड़ों के | of trees |
| तर | नीचे | beneath |
| नित | प्रतिदिन | daily |
| सहत | सहते हैं | endure |
| हिम | ठंड; पाला | cold; frost |
| आतप | धूप की गर्मी | the sun's heat |
| बरषा | वर्षा | rain |
| बात | हवा | wind |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 211
- स्रोत अभिलेख
- 2.211
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 518, 519
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