अयोध्याकाण्ड · दोहा 208 · दोहा/सोरठा
तुम्ह कहँ भरत कलंक यह हम सब कहँ उपदेसु।
तुम्ह कहँ भरत कलंक यह हम सब कहँ उपदेसु।
राम भगति रस सिद्धि हित भा यह समउ गनेसु।।208।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.208 · पुस्तक पृ. 516, 516
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1तुम्ह कहँ भरत कलंक यह हम सब कहँ उपदेसु।
भरत, जिसे तुम अपने लिए कलंक मानते हो, वह हम सबके लिए शिक्षा है।
English explanation
Bharata, what you regard as a stain upon yourself is a lesson for us all.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | तुम्हारे | you |
| कहँ | लिए | for |
| भरत | हे भरत | O Bharata |
| कलंक | कलंक | a stain upon one’s name |
| यह | यह घटना | this |
| हम | हम | us |
| सब | सभी | all |
| कहँ | के लिए | for |
| उपदेसु | शिक्षा | a lesson |
2 राम भगति रस सिद्धि हित भा यह समउ गनेसु।।208।।
राम-भक्ति के रस की सिद्धि के लिए यह अवसर गणेश के समान मंगलकारी बन गया है।
English explanation
For attaining the delight of devotion to Rama, this occasion has become auspicious like Ganesha.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम की | to Rama |
| भगति | भक्ति | devotion |
| रस | रस की | of the delight |
| सिद्धि | प्राप्ति | attainment |
| हित | के लिए | for |
| भा | हो गया | has become |
| यह | यह | this |
| समउ | अवसर | occasion |
| गनेसु | गणेश के समान मंगलकारी | auspicious like Ganesha |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 208
- स्रोत अभिलेख
- 2.208
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 516, 516
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