अयोध्याकाण्ड · दोहा 39 · दोहा/सोरठा
जाइ दीख रघुबंसमनि नरपति निपट कुसाजु।।
जाइ दीख रघुबंसमनि नरपति निपट कुसाजु।।
सहमि परेउ लखि सिंघिनिहि मनहुँ बृद्ध गजराजु।।39।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.39 · पुस्तक पृ. 376, 376
भावार्थ और शब्दार्थ
1जाइ दीख रघुबंसमनि नरपति निपट कुसाजु।।
वहाँ जाकर रघुवंश के रत्न राम ने राजा दशरथ को अत्यंत दयनीय दशा में देखा।
English explanation
Upon arriving, Rama, the jewel of Raghu’s lineage, saw King Dasharatha in an utterly distressed state.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाइ | जाकर | having gone; upon arriving |
| दीख | देखा | saw |
| रघुबंसमनि | रघुवंश के रत्न राम ने | Rama, the jewel of Raghu’s lineage |
| नरपति | राजा दशरथ को | King Dasharatha |
| निपट | अत्यंत; बिल्कुल | utterly; extremely |
| कुसाजु | बुरी, दयनीय दशा में | in a wretched condition |
2 सहमि परेउ लखि सिंघिनिहि मनहुँ बृद्ध गजराजु।।39।।
राजा ऐसे सहमे पड़े थे, मानो कोई बूढ़ा गजराज सिंहिनी को देखकर भयभीत होकर गिर पड़ा हो।
English explanation
The king lay frightened, like an old lord of elephants that had collapsed in terror at the sight of a lioness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहमि | भयभीत होकर | frightened |
| परेउ | पड़े थे; गिर पड़े | lay; had fallen |
| लखि | देखकर | having seen |
| सिंघिनिहि | सिंहिनी को | a lioness |
| मनहुँ | मानो | as though |
| बृद्ध | वृद्ध; बूढ़ा | old; aged |
| गजराजु | हाथियों का राजा; विशाल हाथी | a lord of elephants; a mighty elephant |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 39
- स्रोत अभिलेख
- 2.39
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 376, 376
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।