अयोध्याकाण्ड · दोहा 38 · दोहा/सोरठा
परी न राजहि नीद निसि हेतु जान जगदीसु।
परी न राजहि नीद निसि हेतु जान जगदीसु।
रामु रामु रटि भोरु किय कहइ न मरमु महीसु।।38।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.38 · पुस्तक पृ. 375, 376
भावार्थ और शब्दार्थ
1परी न राजहि नीद निसि हेतु जान जगदीसु।
कैकेयी ने कहा: रात में राजा को नींद नहीं आई; इसका कारण जगदीश्वर जानते हैं।
English explanation
Kaikeyi said: The king did not sleep during the night; the Lord of the universe knows the reason.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परी | आई | came |
| न | नहीं | not |
| राजहि | राजा को | to the king |
| नीद | नींद | sleep |
| निसि | रात में | during the night |
| हेतु | कारण | the reason |
| जान | जानते हैं | knows |
| जगदीसु | जगत के स्वामी ईश्वर | God, Lord of the universe |
2 रामु रामु रटि भोरु किय कहइ न मरमु महीसु।।38।।
‘राम, राम’ रटते हुए राजा ने भोर कर दी, पर वे अपने दुःख का मर्म नहीं बताते।
English explanation
Repeating 'Rama, Rama,' the king passed the night until dawn, but he does not reveal the underlying cause of his distress.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामु | राम का नाम | Rama's name |
| रामु | फिर राम का नाम | Rama's name repeated |
| रटि | बार-बार कहते हुए | repeating continually |
| भोरु | भोर | dawn |
| किय | कर दी | brought on |
| कहइ | बताते हैं | reveals |
| न | नहीं | not |
| मरमु | भीतरी कारण | the underlying cause |
| महीसु | राजा दशरथ | King Dasharatha |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 38
- स्रोत अभिलेख
- 2.38
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 375, 376
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।