अयोध्याकाण्ड · दोहा 40 · दोहा/सोरठा
सुत सनेह इत बचनु उत संकट परेउ नरेसु।
सुत सनेह इत बचनु उत संकट परेउ नरेसु।
सकहु न आयसु धरहु सिर मेटहु कठिन कलेसु।।40।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.4 · पुस्तक पृ. 377, 377
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सुत सनेह इत बचनु उत संकट परेउ नरेसु।
इधर पुत्र का प्रेम है, उधर दिया हुआ वचन; राजा संकट में पड़ गए हैं।
English explanation
On one side is love for his son, on the other his pledged word; the king is caught in a dilemma.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुत | पुत्र के प्रति | for his son |
| सनेह | प्रेम | love |
| इत | इधर, एक ओर | on this side |
| बचनु | दिया हुआ वचन | his pledged word |
| उत | उधर, दूसरी ओर | on the other side |
| संकट | संकट में | in a dilemma |
| परेउ | पड़ गए हैं | has become caught |
| नरेसु | राजा दशरथ | King Dasharatha |
2 सकहु न आयसु धरहु सिर मेटहु कठिन कलेसु।।40।।
यदि तुम कर सको, तो उनकी आज्ञा सिर पर धारण करो और उनका कठिन क्लेश मिटाओ।
English explanation
If you can, honor his command and remove his grievous distress.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकहु | यदि तुम कर सको | if you can |
| न | तो, आग्रहसूचक न | then; an urging particle |
| आयसु | आज्ञा | his command |
| धरहु | धारण करो, स्वीकार करो | bear or accept |
| सिर | सिर पर | upon your head |
| मेटहु | मिटाओ | remove |
| कठिन | कठिन, गंभीर | grievous |
| कलेसु | क्लेश, पीड़ा | distress |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 40
- स्रोत अभिलेख
- 2.4
- सहायक विषय
- श्रीराम-कैकेयी-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 377, 377
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।