अयोध्याकाण्ड · दोहा 128 · दोहा/सोरठा
जसु तुम्हार मानस बिमल हंसिनि जीहा जासु।
जसु तुम्हार मानस बिमल हंसिनि जीहा जासु।
मुकुताहल गुन गन चुनइ राम बसहु हियँ तासु।।128।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.128 · पुस्तक पृ. 450, 451
भावार्थ और शब्दार्थ
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1जसु तुम्हार मानस बिमल हंसिनि जीहा जासु।
आपका यश निर्मल मानसरोवर है और जिसकी जीभ उसमें हंसिनी है—
English explanation
Your glory is a pure Lake Manasa, and the tongue of the person described is a female swan upon it—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जसु | यश | glory |
| तुम्हार | आपका | your |
| मानस | मानसरोवर | Lake Manasa |
| बिमल | निर्मल | pure |
| हंसिनि | हंसिनी | a female swan |
| जीहा | जीभ | tongue |
| जासु | जिसकी | whose |
2 मुकुताहल गुन गन चुनइ राम बसहु हियँ तासु।।128।।
जिसकी जीभ आपके गुणसमूह रूपी मोती चुनती है, हे राम, उसके हृदय में निवास कीजिए।
English explanation
Whose tongue gathers the pearls of your many virtues—O Rama, dwell in that person’s heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुकुताहल | मोती | pearls |
| गुन | आपके गुण | your virtues |
| गन | समूह | multitude |
| चुनइ | चुनती है | picks out |
| राम | हे राम | O Rama |
| बसहु | निवास कीजिए | please dwell |
| हियँ | हृदय में | in the heart |
| तासु | उस व्यक्ति के | of that person |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 128
- स्रोत अभिलेख
- 2.128
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 450, 451
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