अयोध्याकाण्ड · दोहा 129 · दोहा
सबु करि मागहिं एक फलु राम चरन रति होउ।
सबु करि मागहिं एक फलु राम चरन रति होउ।
तिन्ह कें मन मंदिर बसहु सिय रघुनंदन दोउ॥ १२९॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.129 · पुस्तक पृ. 451, 451
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सबु करि मागहिं एक फलु राम चरन रति होउ।
एआई-प्रारूप: सब कुछ करके वे एक ही फल माँगते हैं—राम के चरणों में प्रेम हो।
English explanation
AI draft: Having done all this, they ask for just one reward: may they have love for Rama’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सबु | सब कुछ; ये सभी कर्म | all this; all these acts |
| करि | करके | having done |
| मागहिं | वे माँगते हैं | they ask for |
| एक | एक ही | just one |
| फलु | फल; प्रतिफल | fruit; reward |
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| चरन | चरणों में | for the feet |
| रति | प्रेम; अनुराग | love; devotion |
| होउ | हो; प्राप्त हो | may there be; may they have |
2तिन्ह कें मन मंदिर बसहु सिय रघुनंदन दोउ॥ १२९॥
एआई-प्रारूप: हे सीता और रघुनंदन राम, आप दोनों उनके मनरूपी मंदिर में निवास कीजिए।
English explanation
AI draft: O Sita and Rama, delight of Raghu’s lineage, may you both dwell in the temple of their minds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिन्ह | उन लोगों | those people |
| कें | के | of; their |
| मन | मनरूपी | formed by the mind |
| मंदिर | मंदिर में | in the temple |
| बसहु | निवास कीजिए | please dwell |
| सिय | सीता | Sita, Rama’s consort |
| रघुनंदन | रघुवंश को आनंद देने वाले राम | Rama, delight of Raghu’s lineage |
| दोउ | दोनों | both |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा 129
- स्रोत अभिलेख
- 2.129
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 451, 451
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