अयोध्याकाण्ड · दोहा 130 · दोहा/सोरठा
स्वामि सखा पितु मातु गुर जिन्ह के सब तुम्ह तात।
मूल पाठ
स्वामि सखा पितु मातु गुर जिन्ह के सब तुम्ह तात।
मन मंदिर तिन्ह कें बसहु सीय सहित दोउ भ्रात।।130।।
स्रोत अभिलेख 2.13 · पुस्तक पृ. 452, 452
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे तात! जिनके स्वामी, सखा, पिता, माता और गुरु सब कुछ आप ही हैं, उनके मनरूपी मन्दिरमें सीतासहित आप दोनों भाई निवास कीजिये॥ १३०॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 452 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1स्वामि सखा पितु मातु गुर जिन्ह के सब तुम्ह तात।
English explanation
Dear Rama, for those to whom you are everything—lord, friend, father, mother, and teacher.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्वामि | स्वामी | lord; master |
| सखा | मित्र | friend |
| पितु | पिता | father |
| मातु | माता | mother |
| गुर | गुरु | teacher; spiritual guide |
| जिन्ह | जिन लोगों | those people |
| के | के लिए | for whom |
| सब | सब | all; everything |
| तुम्ह | आप | you |
| तात | हे प्रिय | dear one |
2 मन मंदिर तिन्ह कें बसहु सीय सहित दोउ भ्रात।।130।।
English explanation
In the temple of their minds, may you two brothers, Rama and Lakshmana, dwell together with Sita.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मनरूपी | of the mind |
| मंदिर | मंदिर में | in the temple |
| तिन्ह | उन लोगों | those people |
| कें | के | of |
| बसहु | निवास कीजिए | please dwell |
| सीय | सीता | Sita, Rama's wife |
| सहित | के साथ | together with |
| दोउ | दोनों | both; the two |
| भ्रात | भाई—राम और लक्ष्मण | brothers—Rama and Lakshmana |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 130
- स्रोत अभिलेख
- 2.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 452
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 452, 452
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