अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जे हरषहिं पर संपति देखी। दुखित होहिं पर बिपति बिसेषी।।
मूल पाठ
जे हरषहिं पर संपति देखी। दुखित होहिं पर बिपति बिसेषी।।
जिन्हहि राम तुम्ह प्रानपिआरे। तिन्ह के मन सुभ सदन तुम्हारे।।
स्रोत अभिलेख 2.13 · पुस्तक पृ. 452, 452
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो दूसरेकी सम्पत्ति देखकर हॢषत होते हैं और दूसरेकी विपत्ति देखकर विशेष रूपसे दु:खी होते हैं, और हे रामजी! जिन्हें आप प्राणोंके समान प्यारे हैं, उनके मन आपके रहनेयोग्य शुभ भवन हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 452 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जे हरषहिं पर संपति देखी। दुखित होहिं पर बिपति बिसेषी।।
English explanation
Those who rejoice on seeing others' prosperity and feel especially grieved at others' misfortune.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो | those who |
| हरषहिं | हर्षित होते हैं | rejoice |
| पर | दूसरों की | others' |
| संपति | संपत्ति; समृद्धि | wealth; prosperity |
| देखी | देखकर | on seeing |
| दुखित | दुःखी | grieved |
| होहिं | होते हैं | become; are |
| पर | दूसरों की | others' |
| बिपति | विपत्ति | misfortune; adversity |
| बिसेषी | विशेष रूप से; बहुत | especially; deeply |
2 जिन्हहि राम तुम्ह प्रानपिआरे। तिन्ह के मन सुभ सदन तुम्हारे।।
English explanation
O Rama, the minds of those to whom you are as dear as life are your auspicious dwellings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिन्हहि | जिनको | to whom |
| राम | हे राम | O Rama |
| तुम्ह | आप | you |
| प्रानपिआरे | प्राणों के समान प्रिय | as dear as life |
| तिन्ह | उन लोगों | those people |
| के | के | of |
| मन | मन | minds; hearts |
| सुभ | शुभ; मंगलमय | auspicious |
| सदन | निवास-स्थान | dwellings |
| तुम्हारे | आपके | your |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 452
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 452, 452
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