अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुम्हहि छाड़ि गति दूसरि नाहीं। राम बसहु तिन्ह के मन माहीं।।
मूल पाठ
तुम्हहि छाड़ि गति दूसरि नाहीं। राम बसहु तिन्ह के मन माहीं।।
जननी सम जानहिं परनारी। धनु पराव बिष तें बिष भारी।।
स्रोत अभिलेख 2.13 · पुस्तक पृ. 452, 452
भावार्थ
मूल पाठ के बादऔर आपको छोड़कर जिनके दूसरी कोई गति (आश्रय) नहीं है, हे रामजी! आप उनके मनमें बसिये। जो परायी स्त्रीको जन्म देनेवाली माताके समान जानते हैं और पराया धन जिन्हें विषसे भी भारी विष है;॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 452 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तुम्हहि छाड़ि गति दूसरि नाहीं। राम बसहु तिन्ह के मन माहीं।।
English explanation
O Rama, dwell in the minds of those who have no other refuge apart from you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्हहि | आपको | you |
| छाड़ि | छोड़कर; अलग | apart from; excluding |
| गति | आश्रय; सहारा | refuge; recourse |
| दूसरि | दूसरा | another |
| नाहीं | नहीं है | there is none |
| राम | हे राम | O Rama |
| बसहु | निवास कीजिए | please dwell |
| तिन्ह | उन लोगों | those people |
| के | के | of |
| मन | मन | mind; heart |
| माहीं | में | in; within |
2 जननी सम जानहिं परनारी। धनु पराव बिष तें बिष भारी।।
English explanation
Those who regard another man's wife as a mother and another's wealth as poison more deadly than poison itself.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जननी | माता | mother |
| सम | के समान | like; equal to |
| जानहिं | मानते हैं | they regard |
| परनारी | दूसरे की पत्नी | another man's wife |
| धनु | धन | wealth |
| पराव | दूसरे का; पराया | belonging to another |
| बिष | विष | poison |
| तें | से | than |
| बिष | विष | poison |
| भारी | अधिक घातक | more deadly; more potent |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 452
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 452, 452
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