अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सब के प्रिय सब के हितकारी। दुख सुख सरिस प्रसंसा गारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो सबके प्रिय और सबका हित करनेवाले हैं, जिन्हें दु:ख और सुख तथा प्रशंसा (बड़ाई) और गाली (निन्दा) समान हैं, जो विचारकर सत्य और प्रिय वचन बोलते हैं तथा जो जागते- सोते आपकी ही शरण हैं,॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 452 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सब के प्रिय सब के हितकारी। दुख सुख सरिस प्रसंसा गारी।।
कहहिं सत्य प्रिय बचन बिचारी। जागत सोवत सरन तुम्हारी।।
स्रोत अभिलेख 2.13 · पुस्तक पृ. 452, 452
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सब के प्रिय सब के हितकारी। दुख सुख सरिस प्रसंसा गारी।।
English explanation
Those who are dear to everyone and work for everyone's good, and regard sorrow and joy, praise and abuse alike.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | everyone |
| के | के | to |
| प्रिय | प्रिय | dear; beloved |
| सब | सभी | everyone |
| के | के | for |
| हितकारी | हित करने वाले | those who promote others' welfare |
| दुख | दुःख | sorrow |
| सुख | सुख | joy |
| सरिस | समान | alike; equal |
| प्रसंसा | प्रशंसा | praise |
| गारी | गाली; अपमानजनक वचन | abuse; insulting words |
2 कहहिं सत्य प्रिय बचन बिचारी। जागत सोवत सरन तुम्हारी।।
English explanation
Those who speak truthful and pleasing words after reflection, and remain in your refuge whether awake or asleep.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहिं | कहते हैं | they speak |
| सत्य | सच्चे | truthful |
| प्रिय | प्रिय; सुखद | pleasing; kind |
| बचन | वचन | words |
| बिचारी | विचार करके | after reflecting |
| जागत | जागते हुए | while awake |
| सोवत | सोते हुए | while asleep |
| सरन | शरण में | in refuge |
| तुम्हारी | आपकी | your |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 452
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 452, 452
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।