अयोध्याकाण्ड · दोहा 127 · दोहा/सोरठा
पूँछेहु मोहि कि रहौं कहँ मैं पूँछत सकुचाउँ।
पूँछेहु मोहि कि रहौं कहँ मैं पूँछत सकुचाउँ।
जहँ न होहु तहँ देहु कहि तुम्हहि देखावौं ठाउँ।।127।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.127 · पुस्तक पृ. 449, 450
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1पूँछेहु मोहि कि रहौं कहँ मैं पूँछत सकुचाउँ।
आपने मुझसे पूछा, ‘मैं कहाँ रहूँ?’ किंतु मैं आपसे पूछने में संकोच करता हूँ—
English explanation
You asked me, ‘Where should I dwell?’ But I hesitate to ask you—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूँछेहु | आपने पूछा | you asked |
| मोहि | मुझसे | me |
| कि | कि | introducing the question |
| रहौं | मैं रहूँ | I should dwell |
| कहँ | कहाँ | where |
| मैं | मैं, उत्तर देनेवाला वक्ता | I, the responding speaker |
| पूँछत | पूछने में | in asking |
| सकुचाउँ | संकोच करता हूँ | I hesitate |
2 जहँ न होहु तहँ देहु कहि तुम्हहि देखावौं ठाउँ।।127।।
जहाँ आप नहीं हैं, वह स्थान बता दीजिए; तब मैं आपको रहने की जगह दिखाऊँ।
English explanation
Tell me where you are not present; then I shall show you a place to dwell.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ | where |
| न | नहीं | not |
| होहु | आप हैं | you are present |
| तहँ | वहाँ का स्थान | that place |
| देहु | दीजिए | please do |
| कहि | बताकर | tell |
| तुम्हहि | आपको | to you |
| देखावौं | मैं दिखाऊँ | I shall show |
| ठाउँ | स्थान | a place |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 127
- स्रोत अभिलेख
- 2.127
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 449, 450
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।