अयोध्याकाण्ड · दोहा 138 · दोहा/सोरठा
चित्रकूट के बिहग मृग बेलि बिटप तृन जाति।
चित्रकूट के बिहग मृग बेलि बिटप तृन जाति।
पुन्य पुंज सब धन्य अस कहहिं देव दिन राति।।138।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.138 · पुस्तक पृ. 458, 459
भावार्थ और शब्दार्थ
1चित्रकूट के बिहग मृग बेलि बिटप तृन जाति।
चित्रकूट के पक्षी, वन्य पशु, लताएँ, वृक्ष और घास की सभी जातियाँ—इनके विषय में अगली पंक्ति में देवताओं का कथन है।
English explanation
The birds, wild animals, creepers, trees, and kinds of grass of Chitrakoot are the subject of the gods’ statement in the next line.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चित्रकूट | चित्रकूट | Chitrakoot |
| के | के | of |
| बिहग | पक्षी | birds |
| मृग | वन्य पशु | wild animals |
| बेलि | लताएँ | creepers |
| बिटप | वृक्ष | trees |
| तृन | घास | grass |
| जाति | जातियाँ | kinds |
2 पुन्य पुंज सब धन्य अस कहहिं देव दिन राति।।138।।
देवता दिन-रात ऐसा कहते हैं कि चित्रकूट के ये सभी जीव और वनस्पतियाँ पुण्य के पुंज और धन्य हैं।
English explanation
Day and night the gods say that all these creatures and plants of Chitrakoot are blessed embodiments of merit.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुन्य | पुण्य का | of spiritual merit |
| पुंज | पुंज | a concentrated abundance |
| सब | सभी | all |
| धन्य | धन्य हैं | are blessed |
| अस | ऐसा | thus |
| कहहिं | कहते हैं | say |
| देव | देवता | the gods |
| दिन | दिन | day |
| राति | रात | night |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 138
- स्रोत अभिलेख
- 2.138
- सहायक विषय
- चित्रकूटमें निवास, कोल-भीलोंके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 458, 459
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।