अयोध्याकाण्ड · दोहा 137 · दोहा/सोरठा
नीलकंठ कलकंठ सुक चातक चक्क चकोर।
नीलकंठ कलकंठ सुक चातक चक्क चकोर।
भाँति भाँति बोलहिं बिहग श्रवन सुखद चित चोर।।137।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.137 · पुस्तक पृ. 457, 458
भावार्थ और शब्दार्थ
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1नीलकंठ कलकंठ सुक चातक चक्क चकोर।
नीलकंठ, कोयल, तोते, चातक, चक्रवाक और चकोर—
English explanation
Indian rollers, cuckoos, parrots, chataka birds, ruddy shelducks, and chukars—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नीलकंठ | नीलकंठ पक्षी | Indian rollers |
| कलकंठ | मधुर कंठ वाली कोयल | sweet-voiced cuckoos |
| सुक | तोते | parrots |
| चातक | चातक पक्षी | chataka birds, traditionally rain-seeking birds |
| चक्क | चक्रवाक पक्षी | ruddy shelducks |
| चकोर | चकोर पक्षी | chukar partridges |
2 भाँति भाँति बोलहिं बिहग श्रवन सुखद चित चोर।।137।।
ये पक्षी तरह-तरह की बोलियाँ बोलते हैं, जो कानों को सुख देती हैं और मन मोह लेती हैं।
English explanation
These birds call in many different ways, delighting the ears and captivating the heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भाँति | तरह | ways |
| भाँति | तरह की | of many kinds |
| बोलहिं | बोलते हैं | call |
| बिहग | पक्षी | birds |
| श्रवन | कानों को | to the ears |
| सुखद | सुख देने वाले | delightful |
| चित | मन को | the heart |
| चोर | मोह लेने वाले | captivating |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 137
- स्रोत अभिलेख
- 2.137
- सहायक विषय
- चित्रकूटमें निवास, कोल-भीलोंके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 457, 458
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