अयोध्याकाण्ड · दोहा 136 · दोहा/सोरठा
बेद बचन मुनि मन अगम ते प्रभु करुना ऐन।
बेद बचन मुनि मन अगम ते प्रभु करुना ऐन।
बचन किरातन्ह के सुनत जिमि पितु बालक बैन।।136।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.136 · पुस्तक पृ. 456, 457
भावार्थ और शब्दार्थ
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1बेद बचन मुनि मन अगम ते प्रभु करुना ऐन।
जो वेदों के वचनों और मुनियों के मन की पहुँच से परे हैं, वे करुणा के साक्षात् स्वरूप प्रभु—
English explanation
That Lord, beyond the reach of the Vedas’ words and sages’ minds, the very embodiment of compassion—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बेद | वेदों के | of the Vedas |
| बचन | वचन; कथन | words; utterances |
| मुनि | मुनियों के | of sages |
| मन | मन | minds |
| अगम | पहुँच से परे | beyond reach |
| ते | वे | that; those |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| करुना | करुणा | compassion |
| ऐन | साक्षात् स्वरूप | very embodiment |
2 बचन किरातन्ह के सुनत जिमि पितु बालक बैन।।136।।
—किरातों के वचन ऐसे सुनते हैं, जैसे पिता अपने बालक की बातें सुनता है।
English explanation
—listen to the forest people’s words as a father listens to his child’s speech.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बचन | वचन; बातें | words |
| किरातन्ह | किरातों; वनवासी शिकारियों | forest-dwelling hunters |
| के | के | of |
| सुनत | सुनते हैं | listen to |
| जिमि | जैसे | as |
| पितु | पिता | a father |
| बालक | बालक की | his child’s |
| बैन | बातें; वचन | speech; words |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 136
- स्रोत अभिलेख
- 2.136
- सहायक विषय
- चित्रकूटमें निवास, कोल-भीलोंके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 456, 457
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