अयोध्याकाण्ड · दोहा 135 · दोहा/सोरठा
अब हम नाथ सनाथ सब भए देखि प्रभु पाय।
अब हम नाथ सनाथ सब भए देखि प्रभु पाय।
भाग हमारे आगमनु राउर कोसलराय।।135।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.135 · पुस्तक पृ. 456, 456
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1अब हम नाथ सनाथ सब भए देखि प्रभु पाय।
हे नाथ, आपके चरणों को देखकर अब हम सब आश्रय और रक्षक पाने वाले हो गए हैं।
English explanation
O Lord, having beheld your feet, we have all now found a protector and refuge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| हम | हम | we |
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| सनाथ | स्वामी और रक्षक वाले | having a protector |
| सब | सभी | all |
| भए | हो गए | have become |
| देखि | देखकर | having beheld |
| प्रभु | प्रभु के; आपके | of the Lord; your |
| पाय | चरण | feet |
2 भाग हमारे आगमनु राउर कोसलराय।।135।।
हे कोसलराज, आपका आगमन हमारा सौभाग्य है।
English explanation
O king of Kosala, your coming is our good fortune.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भाग | सौभाग्य | good fortune |
| हमारे | हमारा | our |
| आगमनु | आगमन; आना | arrival; coming |
| राउर | आपका | your |
| कोसलराय | हे कोसल के राजा राम | O Rama, king of Kosala |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 135
- स्रोत अभिलेख
- 2.135
- सहायक विषय
- चित्रकूटमें निवास, कोल-भीलोंके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 456, 456
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।