अयोध्याकाण्ड · दोहा 180 · दोहा/सोरठा
ग्रह ग्रहीत पुनि बात बस तेहि पुनि बीछी मार।
ग्रह ग्रहीत पुनि बात बस तेहि पुनि बीछी मार।
तेहि पिआइअ बारुनी कहहु काह उपचार।।180।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.18 · पुस्तक पृ. 492, 493
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1ग्रह ग्रहीत पुनि बात बस तेहि पुनि बीछी मार।
कोई ग्रह से ग्रस्त हो, फिर वात-रोग के वश हो, और उसे फिर बिच्छू डंक मार दे—
English explanation
Someone is afflicted by a possessing spirit, then overcome by a wind disorder, and then stung by a scorpion—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ग्रह | बाधा पहुँचाने वाला ग्रह या प्रेत | an afflicting spirit |
| ग्रहीत | ग्रस्त | seized or afflicted |
| पुनि | फिर | then |
| बात | वात-रोग | a wind disorder |
| बस | के वश में | overcome by |
| तेहि | उसे | that person |
| पुनि | फिर | then again |
| बीछी | बिच्छू | a scorpion |
| मार | डंक का आघात | the blow of a sting |
2 तेहि पिआइअ बारुनी कहहु काह उपचार।।180।।
और उसे मदिरा पिला दी जाए, तो बताओ, उसका क्या उपचार हो सकता है?
English explanation
And if that person is made to drink liquor, tell me, what remedy could there be?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उसे | to that person |
| पिआइअ | पिलाई जाए | should be made to drink |
| बारुनी | मदिरा | liquor |
| कहहु | बताओ | tell me |
| काह | क्या | what |
| उपचार | इलाज | remedy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 180
- स्रोत अभिलेख
- 2.18
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 492, 493
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