अयोध्याकाण्ड · दोहा 166 · दोहा/सोरठा
कौसल्या के बचन सुनि भरत सहित रनिवास।
कौसल्या के बचन सुनि भरत सहित रनिवास।
ब्याकुल बिलपत राजगृह मानहुँ सोक नेवासु।।166।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.166 · पुस्तक पृ. 481, 481
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 कौसल्या के बचन सुनि भरत सहित रनिवास।
कौसल्या के वचन सुनकर भरत सहित रनिवास की सब स्त्रियाँ व्याकुल हो उठीं।
English explanation
Hearing Kausalya's words, Bharata and all the women of the royal household became distraught.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौसल्या | कौसल्या, राम की माता | Kausalya, Rama's mother |
| के | के | of; possessive marker |
| बचन | वचन; बातें | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| भरत | भरत, राम के भाई | Bharata, Rama's brother |
| सहित | समेत | including; together with |
| रनिवास | अंतःपुर की स्त्रियाँ | the women of the royal household |
2 ब्याकुल बिलपत राजगृह मानहुँ सोक नेवासु।।166।।
सब व्याकुल होकर विलाप करने लगे; राजमहल मानो शोक का निवास बन गया।
English explanation
They lamented in distress; the royal palace seemed to have become the very abode of sorrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्याकुल | व्याकुल; दुःख से व्यथित | distraught; distressed |
| बिलपत | विलाप करते हुए | lamenting |
| राजगृह | राजमहल | the royal palace |
| मानहुँ | मानो | as though |
| सोक | शोक का | of sorrow |
| नेवासु | निवास; घर | abode; dwelling |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 166
- स्रोत अभिलेख
- 2.166
- सहायक विषय
- भरत-कौसल्या-संवाद और दशरथजीकी अन्त्येष्टि क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 481, 481
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