अयोध्याकाण्ड · दोहा 91 · दोहा/सोरठा
कैकयनंदिनि मंदमति कठिन कुटिलपनु कीन्ह।
कैकयनंदिनि मंदमति कठिन कुटिलपनु कीन्ह।
जेहीं रघुनंदन जानकिहि सुख अवसर दुखु दीन्ह।।91।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.91 · पुस्तक पृ. 418, 419
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1कैकयनंदिनि मंदमति कठिन कुटिलपनु कीन्ह।
मंदबुद्धि कैकेयी, कैकय की पुत्री, ने कठोर कुटिलता की।
English explanation
The foolish Kaikeyi, daughter of the Kekaya king, committed a cruel act of treachery.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कैकयनंदिनि | कैकय की पुत्री कैकेयी | Kaikeyi, daughter of the Kekaya king |
| मंदमति | मंदबुद्धि | foolish |
| कठिन | कठोर, निर्दय | cruel; harsh |
| कुटिलपनु | कुटिलता, कपट | treachery; deceit |
| कीन्ह | की | committed |
2 जेहीं रघुनंदन जानकिहि सुख अवसर दुखु दीन्ह।।91।।
जिससे उसने राम और सीता को सुख के अवसर पर दुख दिया।
English explanation
Through that act, she brought sorrow to Rama and Sita at a time meant for happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहीं | जिससे | through which |
| रघुनंदन | रघुवंश के आनंद राम को | to Rama, delight of the Raghu line |
| जानकिहि | जनक की पुत्री सीता को | to Sita, Janaka’s daughter |
| सुख | सुख के | of happiness |
| अवसर | अवसर पर | on the occasion |
| दुखु | दुख | sorrow |
| दीन्ह | दिया | gave; inflicted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 91
- स्रोत अभिलेख
- 2.91
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 418, 419
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।