अयोध्याकाण्ड · दोहा 92 · दोहा/सोरठा
सपनें होइ भिखारि नृप रंकु नाकपति होइ।
सपनें होइ भिखारि नृप रंकु नाकपति होइ।
जागें लाभु न हानि कछु तिमि प्रपंच जियँ जोइ।।92।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.92 · पुस्तक पृ. 419, 420
भावार्थ और शब्दार्थ
1सपनें होइ भिखारि नृप रंकु नाकपति होइ।
सपने में राजा भिखारी हो जाता है और दरिद्र व्यक्ति स्वर्ग का स्वामी हो जाता है।
English explanation
In a dream, a king becomes a beggar, and a pauper becomes the lord of heaven.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सपनें | सपने में | in a dream |
| होइ | हो जाता है | becomes |
| भिखारि | भिखारी | a beggar |
| नृप | राजा | a king |
| रंकु | दरिद्र व्यक्ति | a pauper |
| नाकपति | स्वर्ग का स्वामी, इंद्र | Indra, lord of heaven |
| होइ | हो जाता है | becomes |
2 जागें लाभु न हानि कछु तिमि प्रपंच जियँ जोइ।।92।।
जागने पर उससे न कुछ लाभ होता है, न हानि; संसार के प्रपंच को भी हृदय में उसी प्रकार समझो।
English explanation
Upon waking, there is neither any gain nor loss from it; understand the world’s seeming play in your heart in the same way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जागें | जागने पर | upon waking |
| लाभु | लाभ | gain |
| न | नहीं | neither |
| हानि | हानि | loss |
| कछु | कुछ भी | any |
| तिमि | उसी प्रकार | in the same way |
| प्रपंच | संसार का दृश्य विस्तार | the world’s seeming manifold display |
| जियँ | हृदय में | in your heart |
| जोइ | देखो और समझो | consider and understand |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 92
- स्रोत अभिलेख
- 2.92
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 419, 420
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।