अयोध्याकाण्ड · दोहा 90 · दोहा/सोरठा
सुचि सुबिचित्र सुभोगमय सुमन सुगंध सुबास।
सुचि सुबिचित्र सुभोगमय सुमन सुगंध सुबास।
पलँग मंजु मनिदीप जहँ सब बिधि सकल सुपास।।90।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.9 · पुस्तक पृ. 417, 418
भावार्थ और शब्दार्थ
1सुचि सुबिचित्र सुभोगमय सुमन सुगंध सुबास।
वहाँ स्वच्छ, अत्यंत कलात्मक और सुख-सुविधाओं से युक्त पलंग हैं, तथा सुगंधित फूलों की मनोहर सुवास है।
English explanation
There are clean, exquisitely fashioned beds full of comfort, and the pleasant fragrance of scented flowers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुचि | स्वच्छ | clean |
| सुबिचित्र | अत्यंत कलात्मक और विविध सजावट वाले | exquisitely and elaborately fashioned |
| सुभोगमय | उत्तम सुख-सुविधाओं से युक्त | full of fine comforts |
| सुमन | फूल | flowers |
| सुगंध | सुगंधित | fragrant |
| सुबास | मनोहर सुवास | pleasant scent |
2 पलँग मंजु मनिदीप जहँ सब बिधि सकल सुपास।।90।।
वहाँ सुंदर पलंग और रत्नदीप हैं तथा हर प्रकार की सभी सुख-सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
English explanation
There are beautiful beds and jewel-lamps, with every kind of comfort and convenience available.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पलँग | पलंग | beds |
| मंजु | सुंदर | beautiful |
| मनिदीप | रत्नों के दीप | jewel-lamps |
| जहँ | जहाँ | where |
| सब | हर | every |
| बिधि | प्रकार से | in manner |
| सकल | सभी | all |
| सुपास | उत्तम सुविधाएँ और साधन | fine comforts and conveniences |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 90
- स्रोत अभिलेख
- 2.9
- सहायक विषय
- श्रीरामका शृङ्गवेरपुर पहुँचना, निषादके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 417, 418
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।