अयोध्याकाण्ड · दोहा 266 · दोहा/सोरठा
कीन्ह अनुग्रह अमित अति सब बिधि सीतानाथ।
कीन्ह अनुग्रह अमित अति सब बिधि सीतानाथ।
करि प्रनामु बोले भरतु जोरि जलज जुग हाथ।।266।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.266 · पुस्तक पृ. 565, 566
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1कीन्ह अनुग्रह अमित अति सब बिधि सीतानाथ।
सीतानाथ राम ने हर प्रकार से अत्यंत असीम कृपा की है।
English explanation
Rama, Sita’s lord, has shown utterly boundless grace in every way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कीन्ह | किया | bestowed |
| अनुग्रह | कृपा | grace |
| अमित | असीम | boundless |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| सब | सब | every |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| सीतानाथ | सीता के स्वामी राम ने | Rama, Sita’s lord |
2 करि प्रनामु बोले भरतु जोरि जलज जुग हाथ।।266।।
प्रणाम करके और अपने दोनों कमल-समान हाथ जोड़कर भरत बोले।
English explanation
Bharata bowed and spoke with his two lotus-like hands joined.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having made |
| प्रनामु | प्रणाम | a reverent bow |
| बोले | बोले | spoke |
| भरतु | भरत | Bharata, Rama’s brother |
| जोरि | जोड़कर | joining |
| जलज | कमल-समान | lotus-like |
| जुग | दोनों; जोड़ी | both; a pair |
| हाथ | हाथ | hands |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 266
- स्रोत अभिलेख
- 2.266
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 565, 566
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।