अयोध्याकाण्ड · दोहा 173 · दोहा/सोरठा
कहहु तात केहि भाँति कोउ करिहि बड़ाई तासु।
कहहु तात केहि भाँति कोउ करिहि बड़ाई तासु।
राम लखन तुम्ह सत्रुहन सरिस सुअन सुचि जासु।।173।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.173 · पुस्तक पृ. 487, 487
भावार्थ और शब्दार्थ
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1कहहु तात केहि भाँति कोउ करिहि बड़ाई तासु।
प्रिय पुत्र, बताओ, कोई उनकी बड़ाई किस प्रकार कर सकेगा?
English explanation
Tell me, dear son, how could anyone adequately praise him?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहु | बताओ | tell me |
| तात | प्रिय पुत्र | dear son |
| केहि | किस | what |
| भाँति | प्रकार से | way |
| कोउ | कोई | anyone |
| करिहि | करेगा | will offer |
| बड़ाई | प्रशंसा | praise |
| तासु | उनकी | of him |
2 राम लखन तुम्ह सत्रुहन सरिस सुअन सुचि जासु।।173।।
जिनके राम, लक्ष्मण, तुम्हारे और शत्रुघ्न जैसे पवित्र पुत्र हैं, उनकी बड़ाई कौन कर सकता है?
English explanation
Who could adequately praise one whose virtuous sons are Rama, Lakshmana, you, and Shatrughna?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | दशरथ के पुत्र राम | Rama, son of Dasharatha |
| लखन | दशरथ के पुत्र लक्ष्मण | Lakshmana, son of Dasharatha |
| तुम्ह | तुम, भरत | you, Bharata |
| सत्रुहन | दशरथ के पुत्र शत्रुघ्न | Shatrughna, son of Dasharatha |
| सरिस | जैसे | such as |
| सुअन | पुत्र | sons |
| सुचि | पवित्र | virtuous and pure |
| जासु | जिनके | whose |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 173
- स्रोत अभिलेख
- 2.173
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 487, 487
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।