अयोध्याकाण्ड · दोहा 310 · दोहा/सोरठा
कहत कूप महिमा सकल गए जहाँ रघुराउ।
कहत कूप महिमा सकल गए जहाँ रघुराउ।
अत्रि सुनायउ रघुबरहि तीरथ पुन्य प्रभाउ।।310।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.31 · पुस्तक पृ. 603, 604
भावार्थ और शब्दार्थ
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1कहत कूप महिमा सकल गए जहाँ रघुराउ।
कुएँ की महिमा कहते हुए सभी वहाँ गए जहाँ राम थे।
English explanation
Speaking of the well’s glory, they all went to where Rama was.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहत | कहते हुए | speaking of |
| कूप | कुएँ की | the well’s |
| महिमा | महिमा | glory |
| सकल | सभी | all |
| गए | गए | went |
| जहाँ | जहाँ | where |
| रघुराउ | रघुवंश के राजा राम | Rama, lord of the Raghu line |
2 अत्रि सुनायउ रघुबरहि तीरथ पुन्य प्रभाउ।।310।।
अत्रि ने राम को उस तीर्थ का पुण्यदायक प्रभाव सुनाया।
English explanation
Atri told Rama of that pilgrimage site’s merit-bestowing power.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अत्रि | अत्रि मुनि ने | sage Atri |
| सुनायउ | सुनाया | recounted |
| रघुबरहि | रघुवंशश्रेष्ठ राम को | to Rama, foremost of the Raghu line |
| तीरथ | तीर्थ का | the pilgrimage site’s |
| पुन्य | पुण्यदायक | merit-bestowing |
| प्रभाउ | प्रभाव | power |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 310
- स्रोत अभिलेख
- 2.31
- सहायक विषय
- भरतजीका तीर्थ-जल-स्थापन तथा चित्रकूटभ्रमण
- मुद्रित पृष्ठ
- 603, 604
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