अयोध्याकाण्ड · दोहा 309 · दोहा/सोरठा
अत्रि कहेउ तब भरत सन सैल समीप सुकूप।
अत्रि कहेउ तब भरत सन सैल समीप सुकूप।
राखिअ तीरथ तोय तहँ पावन अमिअ अनूप।।309।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.309 · पुस्तक पृ. 602, 603
भावार्थ और शब्दार्थ
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1अत्रि कहेउ तब भरत सन सैल समीप सुकूप।
तब अत्रि मुनि ने भरत से कहा, ‘पर्वत के पास एक अच्छा कुआँ है।’
English explanation
Then sage Atri said to Bharata, “There is a fine well near the mountain.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अत्रि | अत्रि मुनि ने | sage Atri |
| कहेउ | कहा | said |
| तब | तब | then |
| भरत | भरत | Bharata |
| सन | से | to |
| सैल | पर्वत के | the mountain |
| समीप | पास | near |
| सुकूप | अच्छा कुआँ | a fine well |
2 राखिअ तीरथ तोय तहँ पावन अमिअ अनूप।।309।।
‘तीर्थों का पवित्र, अनुपम अमृत-समान जल वहाँ रख दीजिए।’
English explanation
“Place the sacred waters from the pilgrimage sites there—purifying, incomparable, and like nectar.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राखिअ | रख दीजिए | please place |
| तीरथ | तीर्थों का | from pilgrimage sites |
| तोय | जल | water |
| तहँ | वहाँ | there |
| पावन | पवित्र करने वाला | purifying |
| अमिअ | अमृत-समान | nectar-like |
| अनूप | अनुपम | incomparable |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 309
- स्रोत अभिलेख
- 2.309
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 602, 603
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