अयोध्याकाण्ड · दोहा 304 · दोहा/सोरठा
करम बचन मानस बिमल तुम्ह समान तुम्ह तात।
करम बचन मानस बिमल तुम्ह समान तुम्ह तात।
गुर समाज लघु बंधु गुन कुसमयँ किमि कहि जात।।304।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.304 · पुस्तक पृ. 598, 599
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1करम बचन मानस बिमल तुम्ह समान तुम्ह तात।
प्रिय भाई, कर्म, वचन और मन से तुम निर्मल हो; तुम्हारे समान केवल तुम ही हो।
English explanation
Dear brother, you are pure in deed, speech, and mind; only you are your own equal.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करम | कर्म में | in deed |
| बचन | वचन में | in speech |
| मानस | मन में | in mind |
| बिमल | निर्मल | pure |
| तुम्ह | तुम्हारे | to you |
| समान | समान | equal |
| तुम्ह | तुम ही | you alone |
| तात | हे प्रिय भाई | dear brother |
2 गुर समाज लघु बंधु गुन कुसमयँ किमि कहि जात।।304।।
गुरुजनों की सभा में, इस कठिन समय पर, छोटे भाई के गुण कैसे कहे जा सकते हैं?
English explanation
In the assembly of elders, at this difficult time, how can the younger brother’s virtues be recounted?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरुजनों; बड़ों की | of teachers and elders |
| समाज | सभा में | in the assembly |
| लघु | छोटे | younger |
| बंधु | भाई के | brother’s |
| गुन | गुण | virtues |
| कुसमयँ | इस कठिन या अनुपयुक्त समय में | at this difficult or inopportune time |
| किमि | कैसे | how |
| कहि | कहे | recounted |
| जात | जा सकते हैं | can be |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 304
- स्रोत अभिलेख
- 2.304
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 598, 599
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