अयोध्याकाण्ड · दोहा 305 · दोहा/सोरठा
राज काज सब लाज पति धरम धरनि धन धाम।
राज काज सब लाज पति धरम धरनि धन धाम।
गुर प्रभाउ पालिहि सबहि भल होइहि परिनाम।।305।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.305 · पुस्तक पृ. 599, 600
भावार्थ और शब्दार्थ
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1राज काज सब लाज पति धरम धरनि धन धाम।
राज्य, कामकाज, समस्त मर्यादा और प्रतिष्ठा, धर्म, भूमि, धन और घर—
English explanation
The kingdom, its affairs, all honor and standing, duty, land, wealth, and home—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राज | राज्य | the kingdom |
| काज | कामकाज | affairs |
| सब | सब | all |
| लाज | मान-मर्यादा | honor |
| पति | प्रतिष्ठा | standing |
| धरम | धर्म | duty and righteousness |
| धरनि | भूमि | land |
| धन | संपत्ति | wealth |
| धाम | घर और निवास | home and dwelling |
2 गुर प्रभाउ पालिहि सबहि भल होइहि परिनाम।।305।।
गुरु का प्रभाव इन सबकी रक्षा करेगा और परिणाम अच्छा होगा।
English explanation
The guru's influence will preserve all these, and the outcome will be good.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु का | the guru's |
| प्रभाउ | प्रभाव | influence |
| पालिहि | रक्षा करेगा | will preserve |
| सबहि | इन सबको | all these |
| भल | अच्छा | good |
| होइहि | होगा | will be |
| परिनाम | परिणाम | the outcome |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 305
- स्रोत अभिलेख
- 2.305
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 599, 600
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