अयोध्याकाण्ड · छंद · छंद
सनमानि सुर मुनि बंदि बैठे उतर दिसि देखत भए।
मूल पाठ
सनमानि सुर मुनि बंदि बैठे उतर दिसि देखत भए।
नभ धूरि खग मृग भूरि भागे बिकल प्रभु आश्रम गए॥
तुलसी उठे अवलोकि कारनु काह चित सचकित रहे।
सब समाचार किरात कोलन्हि आइ तेहि अवसर कहे॥
स्रोत अभिलेख 2.226 · पुस्तक पृ. 531, 532
भावार्थ
मूल पाठ के बाददेवताओंका सम्मान (पूजन) और मुनियोंकी वन्दना करके श्रीरामचन्द्रजी बैठ गये और उत्तर दिशाकी ओर देखने लगे। आकाशमें धूल छा रही है; बहुत-से पक्षी और पशु व्याकुल होकर भागे हुए प्रभुके आश्रमको आ रहे हैं। तुलसीदासजी कहते हैं कि प्रभु श्रीरामचन्द्रजी यह देखकर उठे और सोचने लगे कि क्या कारण है? वे चित्तमें आश्चर्ययुक्त हो गये। उसी समय कोल-भीलोंंने आकर सब समाचार कहे।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 532 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1सनमानि सुर मुनि बंदि बैठे उतर दिसि देखत भए।
English explanation
After honoring the gods and bowing to the sages, Rama sat down and began looking northward.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सनमानि | सम्मान करके | having honored |
| सुर | देवताओं को | the gods |
| मुनि | मुनियों को | the sages |
| बंदि | प्रणाम करके | having bowed to |
| बैठे | बैठ गए | sat down |
| उतर | उत्तर | north |
| दिसि | दिशा की ओर | toward the direction |
| देखत | देखने | looking |
| भए | लगे | began |
2नभ धूरि खग मृग भूरि भागे बिकल प्रभु आश्रम गए॥
English explanation
Dust rose in the sky; many birds and wild animals fled in distress and reached Lord Rama’s hermitage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नभ | आकाश में | in the sky |
| धूरि | धूल | dust |
| खग | पक्षी | birds |
| मृग | वन्य पशु | wild animals |
| भूरि | बहुत-से | many |
| भागे | भागे | fled |
| बिकल | व्याकुल | distressed |
| प्रभु | प्रभु राम के | Lord Rama’s |
| आश्रम | आश्रम में | to the hermitage |
| गए | पहुँचे | reached |
3तुलसी उठे अवलोकि कारनु काह चित सचकित रहे।
English explanation
Tulsidas says: Seeing this, Rama rose and remained apprehensive, wondering what had caused it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुलसी | कवि तुलसीदास कहते हैं | the poet Tulsidas says |
| उठे | उठे | rose |
| अवलोकि | देखकर | having seen |
| कारनु | कारण | cause |
| काह | क्या | what |
| चित | मन में | in mind |
| सचकित | सशंकित और चकित | apprehensive and startled |
| रहे | रहे | remained |
4सब समाचार किरात कोलन्हि आइ तेहि अवसर कहे॥
English explanation
At that moment, the Kirat and Kol forest dwellers came and reported all the news.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सारा | all |
| समाचार | समाचार | the news |
| किरात | किरात वनवासियों ने | the Kirat forest dwellers |
| कोलन्हि | कोल वनवासियों ने | the Kol forest dwellers |
| आइ | आकर | having come |
| तेहि | उसी | that very |
| अवसर | समय | moment |
| कहे | बताया | reported |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 2.226
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 532
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 531, 532
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।