अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लखन सपन यह नीक न होई। कठिन कुचाह सुनाइहि कोई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[और बोले—] लक्ष्मण ! यह स्वप्र अच्छा नहीं है। कोई भीषण कुसमाचार (बहुत ही बुरी खबर) सुनावेगा। ऐसा कहकर उन्होंने भाईसहित स्नान किया और त्रिपुरारि महादेवजीका पूजन करके साधुओंका सम्मान किया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 532 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
लखन सपन यह नीक न होई। कठिन कुचाह सुनाइहि कोई।।
अस कहि बंधु समेत नहाने। पूजि पुरारि साधु सनमाने।।
स्रोत अभिलेख 2.226 · पुस्तक पृ. 531, 532
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 लखन सपन यह नीक न होई। कठिन कुचाह सुनाइहि कोई।।
English explanation
Rama said: Lakshmana, this dream is not auspicious; someone will bring distressing, bad news.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखन | हे लक्ष्मण, राम के भाई | Lakshmana, Rama’s brother, addressed here |
| सपन | स्वप्न | dream |
| यह | यह | this |
| नीक | शुभ, अच्छा | auspicious, good |
| न | नहीं | not |
| होई | है, शुभ फल देने वाला है | is, will prove to be |
| कठिन | कठोर, अत्यंत दुःखद | harsh, deeply distressing |
| कुचाह | बुरी खबर | bad news |
| सुनाइहि | सुनाएगा | will tell, will report |
| कोई | कोई व्यक्ति | someone |
2 अस कहि बंधु समेत नहाने। पूजि पुरारि साधु सनमाने।।
English explanation
Having said this, Rama bathed with his brother Lakshmana; he worshipped Shiva and honored the holy men.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| बंधु | भाई लक्ष्मण | his brother Lakshmana |
| समेत | के साथ | together with |
| नहाने | स्नान किया | bathed |
| पूजि | पूजा करके | having worshipped |
| पुरारि | शिव, त्रिपुर के संहारक | Shiva, destroyer of Tripura |
| साधु | साधुओं को | the holy men |
| सनमाने | सम्मान दिया | honored |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.226
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 532
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 531, 532
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।