अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सकल मलिन मन दीन दुखारी। देखीं सासु आन अनुहारी।।
मूल पाठ
सकल मलिन मन दीन दुखारी। देखीं सासु आन अनुहारी।।
सुनि सिय सपन भरे जल लोचन। भए सोचबस सोच बिमोचन।।
स्रोत अभिलेख 2.226 · पुस्तक पृ. 531, 532
भावार्थ
मूल पाठ के बादसभी लोग मनमें उदास, दीन और दु:खी हैं। सासुओंको दूसरी ही सूरतमें देखा। सीताजीका स्वप्र सुनकर श्रीरामचन्द्रजीके नेत्रोंमें जल भर आया और सबको सोचसे छुड़ा देनेवाले प्रभु स्वयं [लीलासे] सोचके वश हो गये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 531 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सकल मलिन मन दीन दुखारी। देखीं सासु आन अनुहारी।।
English explanation
All looked downcast, dispirited, and sorrowful. I saw my mothers-in-law with an altered appearance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकल | सब | all |
| मलिन | उदास, म्लान | downcast, wan |
| मन | मन से | in spirit |
| दीन | दीन, निरुत्साह | dejected |
| दुखारी | दुःखी | sorrowful |
| देखीं | मैंने देखीं | I saw |
| सासु | सासें, राम की माताएँ | mothers-in-law, Rama’s mothers |
| आन | भिन्न, बदला हुआ | different, altered |
| अनुहारी | रूप या आकृति वाली | in appearance |
2 सुनि सिय सपन भरे जल लोचन। भए सोचबस सोच बिमोचन।।
English explanation
Hearing Sita’s dream, Rama’s eyes filled with tears; he who frees others from worry was himself overcome by worry.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सिय | सीता का | Sita’s |
| सपन | स्वप्न | dream |
| भरे | भर गए | filled |
| जल | जल, आँसू | water, tears |
| लोचन | नेत्र | eyes |
| भए | हो गए | became |
| सोचबस | चिंता के वश | overcome by worry |
| सोच | चिंता | worry |
| बिमोचन | दूर करने वाले राम | Rama, who releases others from it |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.226
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 531
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 531, 532
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।