अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उहाँ रामु रजनी अवसेषा। जागे सीयँ सपन अस देखा।।
मूल पाठ
उहाँ रामु रजनी अवसेषा। जागे सीयँ सपन अस देखा।।
सहित समाज भरत जनु आए। नाथ बियोग ताप तन ताए।।
स्रोत अभिलेख 2.226 · पुस्तक पृ. 531, 532
भावार्थ
मूल पाठ के बादउधर श्रीरामचन्द्रजी रात शेष रहते ही जागे। रातको सीताजीने ऐसा स्वप्न देखा [जिसे वे श्रीरामजीको सुनाने लगीं] मानो समाजसहित भरतजी यहाँ आये हैं। प्रभुके वियोगकी अग्रिसे उनका शरीर संतप्त है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 531 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 उहाँ रामु रजनी अवसेषा। जागे सीयँ सपन अस देखा।।
English explanation
Meanwhile, Rama awoke while some of the night still remained. Sita had seen the following dream.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उहाँ | उधर, राम के ठहरने के स्थान पर | there, where Rama was staying |
| रामु | राम | Rama |
| रजनी | रात | the night |
| अवसेषा | कुछ शेष रहते | with some still remaining |
| जागे | जाग उठे | awoke |
| सीयँ | सीता ने | Sita, as the dream’s seer |
| सपन | स्वप्न | a dream |
| अस | ऐसा | such, as follows |
| देखा | देखा | saw |
2 सहित समाज भरत जनु आए। नाथ बियोग ताप तन ताए।।
English explanation
It seemed that Bharata had arrived with the whole company. My lord, their bodies were scorched by the anguish of separation from you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहित | साथ | together with |
| समाज | समाज, साथ आए लोगों का समूह | the company of people |
| भरत | भरत, राम के भाई | Bharata, Rama’s brother |
| जनु | मानो | as though |
| आए | आए हों | had arrived |
| नाथ | हे स्वामी राम | my lord Rama |
| बियोग | आपसे बिछोह | separation from you |
| ताप | संताप, तपन | anguish, burning heat |
| तन | शरीर | bodies |
| ताए | तपे हुए | scorched |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.226
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 531
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 531, 532
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।