अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सकल सनेह सिथिल रघुबर कें। गए कोस दुइ दिनकर ढरकें।।
मूल पाठ
सकल सनेह सिथिल रघुबर कें। गए कोस दुइ दिनकर ढरकें।।
जलु थलु देखि बसे निसि बीतें। कीन्ह गवन रघुनाथ पिरीतें।।
स्रोत अभिलेख 2.226 · पुस्तक पृ. 531, 532
भावार्थ
मूल पाठ के बादसब लोग श्रीरामचन्द्रजीके प्रेमके मारे शिथिल होनेके कारण सूर्यास्त होनेतक (दिनभरमें) दो ही कोस चल पाये और जल-स्थलका सुपास देखकर रातको वहीं [बिना खाये-पीये ही] रह गये। रात बीतनेपर श्रीरघुनाथजीके प्रेमी भरतजीने आगे गमन किया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 531 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सकल सनेह सिथिल रघुबर कें। गए कोस दुइ दिनकर ढरकें।।
English explanation
AI draft: All were weakened by their love for Rama, the foremost of Raghu’s line; they had traveled only two kos when the sun set.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकल | सब लोग | everyone |
| सनेह | स्नेह से | through love |
| सिथिल | शिथिल, दुर्बल | weakened, weary |
| रघुबर | रघुश्रेष्ठ राम | Rama, foremost of Raghu’s line |
| कें | के प्रति; यहाँ स्नेह का संबंधसूचक | for; links the love to Rama |
| गए | चले, पहुँचे | traveled |
| कोस | कोस, दूरी की इकाई | kos, a unit of distance |
| दुइ | दो | two |
| दिनकर | सूर्य | the sun |
| ढरकें | ढलने पर | as it set |
2 जलु थलु देखि बसे निसि बीतें। कीन्ह गवन रघुनाथ पिरीतें।।
English explanation
Finding water and a suitable place, they stayed there; after the night passed, they set out again out of love for Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जलु | जल, पानी | water |
| थलु | स्थल, ठहरने की जगह | ground, a place to stay |
| देखि | देखकर | having seen |
| बसे | ठहरे | stayed |
| निसि | रात | the night |
| बीतें | बीत जाने पर | after it passed |
| कीन्ह | किया | undertook |
| गवन | प्रस्थान, यात्रा | departure, journey |
| रघुनाथ | रघुवंश के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s line |
| पिरीतें | प्रेम के कारण | out of love |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.226
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 531
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 531, 532
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।