अयोध्याकाण्ड · छंद · छंद
रघुराउ सिथिल सनेहँ साधु समाज मुनि मिथिला धनी।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरघुनाथजी, साधुओंका समाज, मुनि वसिष्ठजी और मिथिलापति जनकजी स्नेहसे शिथिल हो गये। सब मन-ही-मन भरतजीके भाईपन और उनकी भक्तिकी अतिशय महिमाको सराहने लगे। देवता मलिन मनसे भरतजीकी प्रशंसा करते हुए उनपर फूल बरसाने लगे। तुलसीदासजी कहते हैं—सब लोग भरतजीका भाषण सुनकर व्याकुल हो गये और ऐसे सकुचा गये जैसे रात्रिके आगमनसे कमल!
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 596 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रघुराउ सिथिल सनेहँ साधु समाज मुनि मिथिला धनी।
मन महुँ सराहत भरत भायप भगति की महिमा घनी॥
भरतहि प्रसंसत बिबुध बरषत सुमन मानस मलिन से।
तुलसी बिकल सब लोग सुनि सकुचे निसागम नलिन से॥
स्रोत अभिलेख 2.301 · पुस्तक पृ. 595, 596
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1रघुराउ सिथिल सनेहँ साधु समाज मुनि मिथिला धनी।
English explanation
Rama, the assembly of holy people, the sages, and Janaka, lord of Mithila, were overcome with affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुराउ | रघुकुल के स्वामी श्रीराम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| सिथिल | भावावेग से शिथिल | overcome with emotion |
| सनेहँ | स्नेह से | through affection |
| साधु | संतों का | of holy people |
| समाज | समूह | assembly |
| मुनि | ऋषि-मुनि | sages |
| मिथिला | मिथिला के | of Mithila |
| धनी | स्वामी, राजा जनक | lord, King Janaka |
2मन महुँ सराहत भरत भायप भगति की महिमा घनी॥
English explanation
In their hearts they praised the immense greatness of Bharata’s brotherly love and devotion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन | the heart |
| महुँ | में | within |
| सराहत | सराह रहे थे | were praising |
| भरत | श्रीराम के भाई भरत के | of Bharata, Rama’s brother |
| भायप | भाईचारे और भ्रातृ-स्नेह | brotherhood and brotherly love |
| भगति | भक्ति | devotion |
| की | की | of |
| महिमा | महानता | greatness |
| घनी | अपार | immense |
3भरतहि प्रसंसत बिबुध बरषत सुमन मानस मलिन से।
English explanation
The gods praised Bharata and showered flowers, though their hearts were somewhat troubled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरतहि | भरत की | Bharata |
| प्रसंसत | प्रशंसा करते हुए | praising |
| बिबुध | देवता | the gods |
| बरषत | बरसा रहे थे | were showering |
| सुमन | फूल | flowers |
| मानस | मन | hearts |
| मलिन | मलिन, अप्रसन्न | troubled, uneasy |
| से | कुछ-कुछ | somewhat |
4तुलसी बिकल सब लोग सुनि सकुचे निसागम नलिन से॥
English explanation
Tulsidas says: hearing Bharata’s words, everyone became distraught and drew inward like lotuses at nightfall.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुलसी | कवि तुलसीदास कहते हैं | the poet Tulsidas says |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| सब | सभी | all |
| लोग | लोग | the people |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सकुचे | सिमट गए | shrank inward |
| निसागम | रात के आगमन पर | at the coming of night |
| नलिन | कमल | lotuses |
| से | के समान | like |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 2.301
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 596
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 595, 596
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।